'Puja' Flowers and other things used in 'puja' (Hindu Worship).: गेंदा के फूल - (Tagetes) - हिंदी ब्लॉग

गेंदा के फूल - (Tagetes) - हिंदी ब्लॉग

गेंदा के फूल - Genda Flowers -(Tagetes)   {Read in English here}

गेंदा के फूल

       भारत में पाया जाने वाला यह फूल विभिन्न क्षेत्रों में बहुतायत से पाया जाता है। यह पीले, नारंगी और गाढ़े कत्थई रंग के प्रजाति में होता है। आकार में भी यह छोटे से लेकर काफी बड़े आकार में मिलता है। गेंद जैसा गोल फूल होने के कारण इसका गेंदा नाम पड़ा। यद्यपि यह जाड़े के दिनों में फूलने वाला पुष्प है परन्तु सालों भर पूजा के लिए इसकी मांग होने के कारण वर्ष भर इसकी नियंत्रित खेती की जाती है। कई किसान सब्जियों के बदले गेंदा की खेती करके भी अच्छी कमाई कर रहे हैं। 

    भगवान विष्णु एवं उनके अवतारों को पीला रंग पसंद होता है इस लिए गेंदा के फूलों को राम, कृष्ण एवं विष्णु को अर्पित करते हैं। देखने में सुन्दर होने के अतिरिक्त इन फूलों में एक हल्की सुगंध होती है। वस्तुतः गेंदा का फूल हिन्दू धर्म में शुभ माना जाता है और सभी देवी देवताओं को अर्पित किया जाता है। गेंदा की माला भगवान् के श्रृंगार में अवश्य उपयोग किया जाता है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजा या किसी अन्य शुभ अवसर पर पूजन ही नहीं बल्कि घर के द्वार पर सजावट में भी इसका प्राथमिकता से उपयोग होता है। दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के अवसर पर घरों और मंदिरों में पूजा और सजावट के लिए गेंदा फूलों और इसकी मालाओं की मांग बहुत बढ़ जाती है। स्वर्ण का रंग पीला होता है अतः धन की देवी लक्ष्मी को पीले वाले गेंदा फूल पसंद होते हैं। 

दिवाली पर कमल और गेंदा 
फूल की बिक्री

                गेंदा केसरिया रंग में भी खिलते हैं। केसरिया रंग का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है क्योंकि यह मोक्ष को दर्शाता है और यही कारण है कि साधू -सन्यासी केसरिया रंग के वस्त्र धारण करते हैं। केसरिया रंग और आसानी से इसकी खेती के कारण गेंदा का फूल हिन्दुओं के लिए पसंदीदा फूल है। यह हिन्दू संस्कृति का भी हिस्सा है। सिर्फ शुभ अवसरों पर ही नहीं बल्कि अंतिम संस्कार में भी इसका उपयोग होता है। मृत शरीर पर अंतिम विदाई में भी गेंदा के फूलों को अर्पित किया जाता है।  

               विभिन्न आकार और रंग के फूल और इनके पौधों की अलग-अलग ऊँचाई के कारण इन्हें फुलवारी में लगाना पसंद किया जाता है। कुछ पौधे काफी छोटे होते हैं जिनमें बड़े -बड़े गेंद जैसे फूल लगते हैं इन्हें गमलों और क्यारियों में लगाना पसंद किया जाता है। ये बड़े आकर्षक लगते हैं। कुछ पौधे बड़े होते हैं जिसमें इकहरे, दोहरे या गेंद जैसे गोल फूल खिलते हैं। जाड़े के दिनों में ये बहुत खिलते हैं। कुछ लोग इस फूल के बहुत शौकीन होते हैं। मुझे याद है कि कई वर्षों पहले राँची के एक धनाढ्य व्यक्ति ने अपने आवासीय परिसर ही नहीं बल्कि अपने दोमंजिले मकान के बालकोनी और बाहरी सीढ़ी को और छत के किनारे किनारे गेंदा फूलों के गमलों से सजाया था जो बहुत ही प्यारे लगते थे।    

क्यारियों में गेंदा के फूल

            अंग्रेजी में कुछ लोग इसे मेरीगोल्ड बोलते हैं परन्तु मेरीगोल्ड इसके जैसे दिखने वाले यूरोपीय फूल होते हैं। इसका अंग्रेजी नाम Tagetes -टजिटिज है। संस्कृत में इसे स्थूलपुष्प के नाम से जाना जाता है। इसके पत्तों में एंटी-सेप्टिक गुण होता है। कहीं कट जाने पर इसके पत्तों रस घाव पर लगाने से इन्फेक्शन होने का डर कम हो जाता है। एक्जिमा जैसे चर्म रोग में इसे सीधे जगह पर लगाया जाता है। पेट और गले सम्बन्धी विकारों में भी इसका आयुर्वेदिक उपयोग है। इस फूल का औद्योगिक और चिकित्स्कीय उपयोग है। गेंदा फूलों के तेल से इत्र बनाया जाता है। इसके सूखे फूलों के चूर्ण का पोल्ट्री फार्म में उपयोग होता है।  

           इसे उगाना भी काफी आसान है। गेंदा के सूखे फूल ही इसके बीज होते हैं। सूखे फूलों को तोड़ने पर इसमें काले रंग के लम्बे लम्बे पतले दाने दीखते हैं। इन्हें चूर कर नर्सरी में छींटा जाता है जिसके ऊपर मिटटी की एक पतली सतह डाली जाती है। फिर पानी के फव्वारे से सींचा जाता है। कुछ दिनों बाद गेंदा के बीज अंकुरित हो कर दिखने लगते हैं। चार-पाँच सेंटीमीटर की ऊँचाई होते ही इन्हें नर्सरी से निकाल कर जगह पर लगाया  जाता है। एक बार लग जाने के बाद इसे ज्यादा देख भाल की जरुरत नहीं होती। जरुरत से ज्यादा खाद पानी देने से कभी कभी पौधे बड़े हो जाते हैं पर फूल कम आते हैं। इस अवस्था को पौधे का पला जाना भी कहते हैं। 
चमकीले पीले गेंदा के फूल बहुत खूबसूरत लगते हैं 

         छोटे आकार वाले फूल ज्यादा संख्या में फूलते हैं जबकि बड़े वाले कम। अपने जरुरत के हिसाब से ही लोग इसकी वैराइटी लगाते हैं। कम जगह में भी इसे लगाने में कोई कठिनाई नहीं होती।   

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इस ब्लॉग के हिंदी पोस्टों की सूची :--

1. ध्रुव के फूल 

2. आक के फूल 

3. अड़हुल, जावा-कुसुम फूल 

4. बिल्व-पत्र, बेलपत्ते 

5. धतूरा के फूल 

6. अपराजिता पुष्प 

7. कनेर के फूल  

8. शमी-पत्र 

9. स्वर्ण चंपा 

10. तुलसी दल 



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